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Current Affairs 07 - 08 July 2017

1) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इज़राइल (Israel) की 3-दिवसीय यात्रा 6 जुलाई 2017 को सम्पन्न हो गई। किसी भारतीय प्रधानमंत्री की इस पहली इज़राइल यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कुल सात समझौते हस्ताक्षरित हुए। भारत की यात्रा पर आने वाला पहला इज़राइली प्रधानमंत्री कौन था? – एरियल शेरोन (Ariel Sharon)

विस्तार: 14 मई 1948 को दुनिया भर के यहूदियों (Jews) के देश के रूप में अस्तित्व में आने के बाद से ही भारत के इज़राइल (Israel) से सम्बन्ध काफी उठा-पटक वाले रहे। शुरू में भारत इज़राइल को मान्यता नहीं देना चाहता था लेकिन अंतत: 17 सितम्बर 1950 में भारत ने उसे मान्यता दे दी। लेकिन दोनों देशों के सम्बन्ध अनौपचारिक ही बने रहे। भारत में इज़राइल के साथ सम्बन्धों का विरोध फलस्तीन (Palestine) तथा तमाम अन्य अरब देशों के साथ सम्बन्धों के खराब होने की संभावना के चलते किया गया। दोनों देशों के सम्बन्ध मजबूत होने का दौर 1990 के दशक में शुरू हुआ।

भारत की यात्रा करने वाले पहले इज़राइली राष्ट्रपति एज़र वीजमैन (Ezer Weizman) थे जो वर्ष 1997 में भारत आए। वहीं लाल कृष्ण अडवाणी (L.K. Advani) वर्ष 2000 में इज़राइल गए तथा यहाँ की यात्रा करने वाले पहले भारतीय मंत्री थे। लेकिन वर्ष 2003 में इज़राइली प्रधानमंत्री एरियल शेरोन (Ariel Sharon) की भारत यात्रा ऐतिहासिक रही क्योंकि इससे दोनों देशों के सम्बन्ध मजबूत होने की पुष्टि कर दी। हालांकि इस यात्रा का भारत की कम्यूनिस्ट पार्टियों और मुस्लिम पक्षों ने तीव्र विरोध किया।

प्रणब मुखर्जी इज़राइल की यात्रा करने वाले पहले भारतीय राष्ट्रपति थे। यह यात्रा अक्टूबर 2015 के दौरान की गई थी।

4 जुलाई 2017 को नरेन्द्र मोदी जब इज़राइल पहुँचे थे तब वे ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए। लेकिन उन्होंने इस दौरे में फलस्तीन का दौरा न कर एक पुरानी परम्परा को तोड़ा। उल्लेखनीय है कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह की इज़राइल यात्रा के अलावा सभी भारतीय प्रतिनिधियों ने इज़राइल यात्रा के साथ फलस्तीन की यात्रा को भी जोड़ा था।

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2) 6 जुलाई 2017 को जारी अपने दिशानिर्देशों में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने बैंक खाताधारकों के खातों से अवैध धन निकासी होने पर ग्राहकों की अधिकतम देनादारी (maximum liability) तय कर दी। केन्द्रीय बैंक ने यह दिशानिर्देश जारी करते समय यह भी कहा कि किसी तीसरे पक्ष के चलते (जब न तो ग्राहक की गलती हो और न बैंक की) ग्राहकों की देनदारी शून्य (zero liability) होगी। इस निर्देश के अनुसार किसी अवैध निकासी होने के कितने दिनों के भीतर ग्राहक द्वारा बैंक को सूचित करने पर उसे कोई नुकसान नहीं होगा? – 3 दिन कार्यदिवस

विस्तार: भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी दिशानिर्देश के अनुसार ऐसे बैंक ग्राहकों को कोई नुकसान नहीं होगा जब वे अपने खाते से किसी अवैध निकासी होने के तीन कार्यदिवस के भीतर इसके बारे में बैंक को सूचित कर देते हैं। ऐसा करने पर उनका पैसा 10 दिन के भीतर बैंक द्वारा वापस किया जायेगा।

आरबीआई ने यह दिशानिर्देश ‘Customer Protection – Limiting Liability of Customers in Unauthorised Electronic Banking Transactions’ नामक सर्कुलर को जारी करते हुए पेश किए। हाल के समय में खातों तथा कार्डों से अवैध निकासी होने की घटनाओं में आई तेजी के चलते बैंक ने यह सर्कुलर बैंकों को जारी किया है।

इस दिशानिर्देश के अनुसार किसी तीसरे पक्ष के द्वारा धोखाधड़ी कर खाते से पैसा निकालने की स्थिति में यदि ग्राहक ने चार से दस कार्यदिवस के भीतर बैंक को सूचित किया तो ऐसे मामलों में ग्राहकों की अधिकतम देनदारी 25,000 रुपए होगी और यह चालू खातों/ अवरड्राफ्ट खातों/ 5 लाख रुपए से अधिक सीमा वाले क्रेडिट कार्डों पर लागू होगी। वहीं बचत खातों के लिए अधिकतम देनदारी 5,000 रुपए होगी। लेकिन यदि ग्राहक ने तय समय के भीतर बैंक को सूचित कर दिया है तो ऐसे मामलों में होने वाले पूरे नुकसान के लिए बैंक जिम्मेदार होंगे।

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3) 6 जुलाई 2017 को किसने भारत के 21वें मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर पद ग्रहण किया? – अचल कुमार जोति (Achal Kumar Joti)

विस्तार: अचल कुमार जोति (Achal Kumar Joti) 6 जुलाई 2017 को देश के 21वें मुख्य चुनाव आयुक्त (21st Chief Election Commissioner (CEC) of India) बन गए। उन्होंने एक दिन पूर्व 5 जुलाई 2017 को इस पद से सेवानिवृत्त होने वाले नसीम ज़ैदी (Nasim Zaidi) का स्थान लिया। जोति मई 2015 से तीन-सदस्यीय चुनाव आयोग में चुनाव आयुक्त के तौर पर तैनात थे।

उल्लेखनीय है कि 64-वर्षीय जोति गुजरात (Gujarat) के मुख्य सचिव (Chief Secretary) रह चुके हैं जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राज्य के मुख्यमंत्री थे। वे 1975-बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी हैं तथा जनवरी 2018 तक इस पद पर रहेंगे।

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4) सेवानिवृत्त कर्मचारियों के कोष का प्रबन्धन करने वाली संस्था कर्मचारी भविष्यनिधि संगठन (EPFO) ने 5 जुलाई 2017 को अपनी सेवाएं प्रदान करने का अधिकार पाँच और बैंकों को दे दिया तथा इनमें से 4 निजी बैंक (private bank) हैं। इस प्रकार यह पहली बार हुआ है जब निजी बैंक को ईपीएफओ ने अपना पार्टनर बैंक बनाया है। ये 4 निजी बैंक कौन से हैं? – आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिन्द्रा बैंक, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक

विस्तार: उल्लेखनीय है कि प्रारंभ के 60 वर्षों में सिर्फ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) कर्मचारी भविष्यनिधि संगठन (Employees Provident Fund Organisation – EPFO) की सेवाएं प्रदान करने वाला पार्टनर बैंक था। फिर दिसम्बर 2016 में संगठन ने सार्वजनिक क्षेत्र के चार और बैंकों को यह दर्जा प्रदान किया। ये चार बैंक थे – पंजाब नेशनल बैंक, इलाहाबाद बैंक, यूनियन बैंक और इण्डियन बैंक। अब 5 जुलाई 2017 को 5 और बैंकों को संगठन का पार्टनर बैंक बनाया गया है जिसमें से 4 निजी बैंक हैं – आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank), कोटक महिन्द्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank), एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) और एक्सिस बैंक (Axis Bank)। इसमें पाँचवां बैंक सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda) है। इस प्रकार EPFO के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब निजी बैंक को सेवाएं प्रदान करने के लिए पार्टनर बैंक का दर्जा प्रदान किया गया है।

खास बात यह है कि दस बैंकों को पार्टनर बनाने से EPFO के वार्षिक ट्रांज़ेक्शन खर्चों में लगभग 300 करोड़ की कमी आयेगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह बैंक संगठन के खाताधारकों के लेन-देन पर कोई शुल्क नहीं वसूलेंगे।

अब संगठन ने 7 और बैंकों को अपना पार्टनर बनाने का आह्वान किया है तथा ऐसा होने पर संगठन के ट्रांज़ेक्शन खर्चों में 40 से 45 करोड़ रुपए की और कमी आयेगी। इससे संगठन का कुल वार्षिक ट्रांज़ेक्शन 350 करोड़ से घटकर खर्च मात्र 10 करोड़ रुपए रह जायेगा।

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5) कौन सा राज्य गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (Goods and Service Tax – GST) से सम्बन्धित विधेयक को 5 जुलाई 2017 को पारित कर इस व्यवस्था को लागू करने वाला देश का अंतिम राज्य बन गया? – जम्मू एवं कश्मीर

विस्तार: जम्मू एवं कश्मीर (Jammu & Kashmir) की विधानसभा ने गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स (GST) को राज्य में लागू करने से सम्बन्धित प्रस्ताव को 5 जुलाई 2017 को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी जिससे यह राज्य इस नई कर व्यवस्था को अपनाने वाला देश का अंतिम राज्य बन गया। इस विधेयक से सम्बन्धित प्रस्ताव को राज्य के वित्त मंत्री हसीन द्राबू (Haseeb Drabu) ने रखा था तथा तमाम विपक्षियों के विरोध के बावजूद इसे ध्वनिमत से पारित करा लिया गया।

1 जुलाई 2017 से देश भर में शुरू हुई जीएसटी व्यवस्था से सम्बन्धित विधेयकों को देश के अन्य सभी राज्य पहले ही पारित कर चुके हैं।

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