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Current Affairs 17 - 20 March 2017

1) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के नए मुख्यमंत्री (Chief Minister) की शपथ ली। हालांकि कट्टरवादी हिंदूवादी छवि के कारण इस पद पर उनके चयन को लेकर तमाम सवाल उठाए गए थे। आदित्यनाथ किस सामाजिक-सांस्कृतिक के संस्थापक है जो प्राय: चर्चा में रहता है? – हिन्दू युवा वाहिनी

विस्तार: 45-वर्षीय योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2002 में हिन्दू युवा वाहिनी नामक (Hindu Yuva Vahini) संगठन की स्थापना की थी। लगातार 5 बार गोरखपुर से सांसद रहे योगी के इस संगठन का नाम कई बार चर्चा में आता रहा है हालांकि यह एक सामाजिक-सांस्कृतिक के रूप में स्थापित किया गया है।

 उत्तराखण्ड के पौड़ी गड़वाल में जन्में आदित्यनाथ कम आयु में विरक्त हो गए थे तथा गोरक्षनाथ पीठ गोरखपुर में उन्होंने सन्यास की दीक्षा ले ली थी। बाद में महंत अवैद्यनाथ के स्थान पर उन्हें यहाँ का पीठाधीश नियुक्त किया गया था। वे राज्य में अपनी अतिवादी तथा कट्टरवादी छवि के कारण जाने जाते हैं और कई बार विवादास्पद बयान देकर चर्चा में रहे हैं।

 उन्हें भाजपा के विधायक मण्डल ने 18 मार्च 2017 को वरिष्ठ नेताओं की उपस्थिति में प्रदेश का अगला मुख्यमंत्री चुना था। 19 मार्च 2017 उन्होंने राज्य के 21 वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले ली। उन्होंने समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का स्थान लिया। वहीं राजधानी लखनऊ के कांशीराम स्मृति उपवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) और लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा (Dinesh Sharma) को उप-मुख्यमंत्री की शपथ दिलाई गई।

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2) 18 मार्च 2017 को किसने उत्तराखण्ड (Uttarakhand) के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली? – त्रिवेन्द्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat)

विस्तार: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के पूर्व प्रचारक त्रिवेन्द्र सिंह रावत (Trivendra Singh Rawat) ने 18 मार्च 2017 को उत्तराखण्ड के नौवें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इससे एक दिन पूर्व भाजपा विधायक दल ने उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में चुना था। उन्होंने हाल ही में सम्पन्न विधानसभा चुनावों में डोइवाला (Doiwala) सीट से जीत हासिल की थी।

 त्रिवेन्द्र रावत वर्तमान में गंगा नदी को स्वच्छ करने से जुड़े अभियान “नमामी गंगे” (‘Namami Gange’) के संयोजक हैं। वर्ष 2000 में जब उत्तर प्रदेश को काटकर पृथक उत्तराखण्ड की स्थापना की गई थी तब वे भाजपा की उत्तराखण्ड इकाई के महासचिव थे। उन्होंने कांग्रेस हरीश रावत (Harish Rawat) का स्थान लिया।

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3) कांग्रेस के अमरिन्दर सिंह (Amrinder Singh) को 16 मार्च 2017 को पंजाब (Punjab) के नए मुख्यमंत्री (Chief Minister) की शपथ दिलाई गई। राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में यह उनका कौन सा कार्यकाल है? – दूसरा

विस्तार: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने 16 मार्च 2017 को पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू किया जब उन्हें इस दिन राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई। उनके नेतृत्व में कांग्रेस ने सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल (SAD) को राज्य में हुए विधानसभा में बुरी तरह से हराया था।

 इससे पहले अमरिन्दर सिंह वर्ष 2002 से 2007 के बीच राज्य के मुख्यमंत्री रहे थे। उन्होंने प्रकाश सिंह बादल का स्थान लिया।

(Photo Courtesy : PTI)

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4) केन्द्र सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 (National Health Policy 2017) को अंतत: मार्च 2017 के दौरान अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। नई स्वास्थ्य नीति के तहत जीवन प्रत्याशा (life expectancy) को वर्ष 2025 तक वर्तमान 67.5 वर्ष से कितना करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है? – 70 वर्ष

विस्तार: उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 स्वीकृत करने के लिए इससे पहले भी दो बार तैयारी की गई थी लेकिन नीति को अंतिम स्वीकृति नहीं मिल पाई थी। लेकिन मार्च 2017 के दौरान अंतत: इस नीति को केन्द्र सरकार ने अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। इस नीति में तय लक्ष्यों में एक प्रमुख लक्ष्य है जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) को वर्तमान 67.5 से बढ़ाकर वर्ष 2025 तक 70 वर्ष तक करना। इसके अलावा नवजात मृत्यु दर (infant mortality rate) भी वर्ष 2019 तक घटा कर 28 प्रति हजार जन्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जहाँ तक 5 वर्ष तक की शिशु मृत्यु दर की बात है तो इसे वर्ष 2025 तक घटाकर 23 प्रति हजार जन्म तक लाने का लक्ष्य तय किया गया है।

 राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में सार्वजनिक स्वास्थ्य खर्च को चरणबद्ध तरीके से सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2.5% तक पहुँचाने का वृहद लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए भी वर्ष 2025 को लक्ष्य वर्ष के रूप में निर्धारित किया गया है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति वर्ष 2002 में जारी की गई थी।

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5) रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने स्वदेशी तकनीक से निर्मित पहली लोकल उपनगरीय रेलगाड़ी को 18 मार्च 2017 को झण्डी दिखा कर रवाना किया। इस रेल का नाम क्या रखा गया है? – “मेधा” (Medha)

विस्तार: स्वदेशी तकनीक से निर्मित भारत की पहली लोकल उपनगरीय रेलगाड़ी (first indigenously built suburban train rake) को “मेधा” (‘Medha’) नाम दिया गया है। ऐसी पहली मेधा रेलगाड़ी को 18 मार्च 2017 को मुम्बई के चर्चगेट स्टेशन से रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने झण्डी दिखा कर रवाना किया। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में भारतीय रेल की उपनगरीय रेल नेटवर्क में विदेशी रेक वाली EMU रेलगाड़ियों का प्रयोग किया जाता है। इसके लिए विदेशी कम्पनियों जैसे सीमेन्स (Siemens) और बोम्बार्डियर (Bombardier) से रेक आयातित की जाती हैं जो रेलगाड़ी के अलावा इससे सम्बन्धित कंट्रोल सर्किट प्रौद्यौगिकी भी प्रदान करते हैं। लेकिन अब देश में पहली बार स्वदेशी तकनीक से ऐसी रेलगाड़ी विकसित की गई है जिसकी लागत आयातित रेलगाड़ी से कम तो आयेगी ही साथ ही यह यात्रियों के लिए अधिक सुविधाजनक भी होगी।

 पश्चिम रेलवे (WR) को 12 डिब्बों वाली ऐसी दो मेधा ट्रेन प्रदान की गई हैं, जिनमें से एक को 18 मार्च 2017 को शुरू किया गया। इस नई रेलगाड़ी रेक का निर्माण चेन्नई स्थिति एंटेग्रल कोच फैक्ट्री (ICF, Chennai) में किया गया है।

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6) लोकसभा में विदेश मंत्रालय द्वारा 15 मार्च 2017 को प्रदत्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2015-16 के दौरान भारत ने संयुक्त राष्ट्र (United Nations) को अपनी तरफ से कितनी धनराधि प्रदान की थी? – 244 करोड़ रुपए

विस्तार: भारत ने वर्ष 2015-16 के दौरान संयुक्त राष्ट्र संघ (UNited Nations Organisation) को कुल 244 करोड़ रुपए का आर्थिक योगदान (economic contribution) किया जोकि इससे पिछले वर्ष में किए गए कुल योगदान के मुकाबले 55% अधिक था। वर्ष 2014-15 में भारत का संयुक्त राष्ट्र को कुल योगदान 157 करोड़ रुपए था। यह जानकारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने 15 मार्च 2017 को लोकसभा (Lok Sabha) में प्रदान की।

 उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक सदस्य को संगठन के तमाम नियमित खर्चों तथा शांति अभियानों के संचालन के लिए अपनी तरफ से कुछ आर्थिक योगदान करना होता है। इस योगदान की मात्रा का निर्धारण सदस्य राष्ट्र की क्षमता के आधार पर तय किया जाता है।

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7) दिग्गज वैश्विक इस्पात कम्पनी पॉस्को (Posco) ने मार्च 2017 के दौरान ओडीशा (Odisha) सरकार को पत्र लिखकर राज्य के पारादीप (Paradip) के पास प्रस्तावित 12 मिलियन टन क्षमता की इस्पात परियोजना (steel project) को औपचारिक रूप से बंद करने की घोषणा कर दी। पॉस्को किस देश की सुप्रसिद्ध इस्पात कम्पनी है? – दक्षिण कोरिया (South Korea)

विस्तार: उल्लेखनीय है कि दक्षिण कोरिया की सुप्रसिद्ध वैश्विक इस्पात कम्पनी पॉस्को (Posco) ने जून 2005 के दौरान ओडीशा में 12 मिलियन टन स्टील उत्पादन क्षमता वाले अपने भारी-भरकम संयंत्र लगाने के लिए राज्य सरकार के साथ 4,004 एकड़ जमीन खरीदने के लिए एक करार किया था। लेकिन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया स्थानीय लोगों के विरोध के कारण विलम्बित होती गई तथा बाद में यह विरोध काफी हिंसक हो गया था। अंतत: राज्य सरकार ने वर्ष 2013 में पॉस्को को पहले चरण में 8 मिलियन टन का संयंत्र लगाने के लिए 2,700 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जिसमें से 1,700 एकड़ भूमि कम्पनी को प्रदान भी कर दी गई।

 लेकिन तमाम विवाद झेल रही इस परियोजना पर जनवरी 2015 में केन्द्र सरकार द्वारा पारित खान व खनिज विकास एवं नियमन कानून (Mines and Minerals Development and Regulation Act) की मार पड़ी जिसमें कम्पनी को परियोजना के लिए नीलामी से जमीन हासिल करने का निर्देश दिया गया। इससे कम्पनी को लौह-अयस्क खानों का आवंटन प्राथमिकता के आधार पर होने की समस्त संभावना धूमिल हो गई। अंतत: पॉस्को ने मार्च 2017 में राज्य सरकार को पत्र लिखकर आवंटित जमीन को वापस लेने को कहा है तथा इस परियोजना से पूरी तरह से बाहर जाने की औपचारिक घोषणा भी कर दी।

 पॉस्को आर्सेलरमित्तल (ArcelorMittal) के बाद ओडीशा राज्य को छोड़ने वाली दूसरी भारी-भारकम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) वाली परियोजना है।

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http://churugurukul.com/current-affairs-15-16-march-2017